खैरागढ़ अपडेट–छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में पंडवानी गायन की पहचान बन चुकीं पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया।

उनके निधन से छत्तीसगढ़ की लोककला जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है और पूरे देश में शोक की लहर है।तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी "कापालिक शैली" के माध्यम से पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई।

उनकी प्रस्तुतियों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे अकेले ही तंबूरे के साथ महाभारत की पूरी कथा का गायन और अभिनय करती थीं। मंच पर वे कभी भीम, कभी अर्जुन तो कभी द्रौपदी जैसे पात्रों को जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं।अपने लंबे कला जीवन में तीजन बाई ने भारत सहित दुनिया के कई देशों में 1,000 से अधिक मंचों पर पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का परचम लहराया।

तीजन बाई जी का प्रमुख सम्मान
- पद्मश्री – 1988
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार – 1995
- पद्मभूषण – 2003
- पद्म विभूषण – 2019
तीजन बाई का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गनियारी में किया जाएगा। उनके निधन से भारतीय लोककला जगत ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी है। उनकी आवाज, उनकी कला और पंडवानी को नई पहचान दिलाने का उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।

